छत्तीसगढ़ के अभ्यारण्यों में बाघों पर शिकारियों ने गड़ाए पैने दांत
रायपुर । बाघों की जान खतरे में है। प्रदेश के अभयारण्य क्षेत्रों में उनकी सुरक्षा पुख्ता नहीं है। यह सब वन विभाग की लापरवाही से है। शिकारी अपने पैने दांत आज भी गड़ाए हैं। पिछले 10 बरस में छत्तीसगढ़ के विभिन्न् अभयारण्यों और इनके आसपास से करीब 16 बाघों की खाल समेत अन्य अवशेष बरामद किए जा चुके हैं। हाल ही में भोरमदेव अभयारण्य में बाघ के नाखून, दांत और खोपड़ी की बरामदगी के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में इन्हें ही प्रथमदृष्टया शिकारी मानकर पूछताछ की जा रही है। समझा जाता है कि वन्य जीवों पर शिकारी फिर से निशाना साे हैं। सुरक्षा के नाम पर खानापूरी भोरमदेव अभयारण्य राज्य विभाजन के पूर्व कान्हा नेशनल पार्क का बफर यानी एक हिस्सा था लेकिन, छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद इसे सेंचुरी घोषित कर दिया गया। इसके संरक्षण और बाघों के मूवमेंट पर नजर रखने की जिम्मेदारी वन विभाग की हो गई लेकिन, वनरक्षक और अभयारण्य के बीट गार्ड के पदों पर नई भर्ती नहीं हो सकी। ऐसे में अभयारण्य में बाघों की सुरक्षा की कवायद नाम मात्र ही है। बाघिन के शिकार के बाद आया था हाईकोर्ट का आदेश 15 नवंबर,...